राजकुमार राव और वामिका गब्बी की फिल्म ‘भूल चूक माफ’ के रिलीज का फैंस लंबे वक्त से इंतजार कर रहे थे। इस फैमिली ड्रामा फिल्म ने आज यानी 23 मई को सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है। ऐसे में अगर आप अपनी फैमिली या फ्रेंड्स के साथ वीकेंड में इस फिल्म को थिएटर में देखने का प्लान बना रहे हैं तो ये रिव्यू आपके लिए है। ‘भूल चूक माफ’ का रिव्यू पढ़िए और फिर तय की कीजिए कि क्या आपको ये मूवी देखनी है या नहीं।
भूल चूक माफ मूवी रिव्यू
निर्देशक: करण शर्मा
कास्ट: राजकुमार राव, वामिका गब्बी
स्टार रेटिंग: ★★.5
कुछ ऐसी है ‘भूल चूक माफ’ की कहानी
‘भूल चूक माफ’ एक टाइम लूप ड्रामा है। रंजन तिवारी (राजकुमार राव) तितली (वामिका गब्बी) से प्यार करता है और वो दोनों शादी करने के लिए बेताब हैं। लेकिन उसके पिता की एक शर्त है: सरकारी नौकरी करो, या फिर उनकी बेटी को हमेशा के लिए भूल जाओ। ऐसे में मूवी में एंट्री होती है भगवान दास (संजय मिश्रा) की, जो नौकरियों के दलाल होते हैं। भगवान दास रंजन से पैसे लेकर उसे सरकारी नौकरी दिलाता है। उसे नौकरी मिल भी जाती है। इसके बाद दोनों घरों में शादी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। उसकी हल्दी की रस्म के बाद जब वो अगले दिन सोकर उठता है वो देखत है कि फिर से उसकी हल्दी है और वही तारीख। वो इस टाइम लूप में बुरी तरह से फंस जाता है। अब वो इससे कैसे निकलता है आगे क्या होता है, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।
फिल्म की कमजोर कड़ी
निर्देशक करण शर्मा की कहानी को मेन मुद्दे पर पहुंचने में बहुत समय लगता है। फिल्म का पहला भाग काफी कमजोर नजर आ रहा है। कई जगहों पर डायलॉग काफी तीखे लग रहे हैं। राजकुमार की कॉमिक टाइमिंग से बमुश्किल ही उसे बचाया जा सकता है। मैडॉक (प्रोडक्शन हाउस) की पिछली कई फिल्मों जैसे मिमी, लुका छुपी, तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया में भी यही सेटअप दिखाया गया है- यहां तक कि स्टार्स को भी दोहराया गया है। और इससे भी बुरी बात यह है कि परिवार के सदस्यों के बीच पर्याप्त केमिस्ट्री नहीं है। मूवी में हंसी मजाक भी पूरी तरह से सेट नहीं बैठ रहे हैं। हालांकि, राजकुमार और वामिका के बीच की केमिस्ट्री आपको पसंद आएगी।
फिल्म देखें या नहीं?
अगर आपको कॉमेडी पसंद है तो शायद ‘भूल चूक माफ’ पसंद आए। हालांकि, इस फिल्म से बहुत ज्यादा उम्मीदें मत रखिएगा क्योंकि कहानी अपने आप में ही काफी उलझी हुई नजर आ रही है। स्टार्स का आपस में एक दूसरे के साथ तालमेल भी बिखरा सा लग रहा है।